नक्षत्र और पाद क्या हैं?
हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और चार पादों में बांटा जाता है। चंद्रमा की सटीक डिग्री से जन्म नक्षत्र और पाद तय होता है।
विंशोत्तरी दशा से संबंध
हर नक्षत्र का एक ग्रह स्वामी होता है। जन्म नक्षत्र और उसमें चंद्रमा की स्थिति से यह तय होता है कि जन्म के समय कौन-सी महादशा चल रही थी और उसका कितना हिस्सा बाकी था।
नक्षत्र को पूरे चार्ट के साथ पढ़ें
नक्षत्र महत्वपूर्ण है, लेकिन अकेले पूरा जीवन या व्यक्तित्व तय नहीं करता। इसे लग्न, राशि, ग्रह और दशा के साथ देखना अधिक उपयोगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जन्म कुंडली कैसे पढ़ें और लग्न क्या होता है?
पहले लग्न, फिर 12 भाव, ग्रहों की राशि, भावेश, दृष्टि और चंद्र नक्षत्र देखें। जन्म का सही समय आवश्यक है क्योंकि लग्न और भाव बदल सकते हैं।
कुंडली के 12 भाव क्या बताते हैं?
पहला भाव स्वयं, दूसरा धन, तीसरा प्रयास, चौथा घर, पाँचवाँ शिक्षा, छठा सेवा, सातवाँ विवाह, आठवाँ परिवर्तन, नौवाँ भाग्य, दसवाँ करियर, ग्यारहवाँ लाभ और बारहवाँ खर्च से जुड़ा माना जाता है।
मेरी महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा कब शुरू और खत्म होगी?
विंशोत्तरी दशा की गणना जन्म के चंद्र नक्षत्र से होती है। जन्म तिथि, सही समय, स्थान और अयनांश से महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा, सूक्ष्म और प्राण दशा की तारीखें निकालें।
क्या शनि, राहु और केतु की दशा हमेशा खराब होती है?
नहीं। ग्रह का भाव, राशि, दृष्टि, युति और चल रही उपदशा साथ में देखी जाती है। किसी ग्रह का नाम सुनकर निश्चित बुरे परिणाम मानना सही नहीं है।
ज्योतिष को संदर्भ की तरह उपयोग करें, निश्चितता की तरह नहीं
ज्योतिष व्याख्यात्मक है। कोई चार्ट या दशा किसी खास जीवन घटना की गारंटी नहीं देती। महत्वपूर्ण निर्णयों में वास्तविक जानकारी और उचित पेशेवर सलाह भी शामिल करें।
